Piles In Hindi- बवासीर (Piles)- प्रकार, लक्षण, कारण, इलाज और परहेज |
बवासीर जिन्हे हम पाइल्स (Piles) के नाम से जाना जाता है। यह पुरानी कब्ज़ और टाईट दस्त के कारण होता है। बवासीर एक बहुत ही दर्दनाक और असहज बीमारी है। यह भले ही जानलेवा न हो लेकिन अगर हम इसे बहुत देर तक नज़र अंदाज़ करे तो यह गंभीर रूप में सकती है। यदि आप पहले से ही बवासीर से पीड़ित हैं या अपनी समझ को बवासीर के लक्षण के बारे में विस्तारित करना चाहते हैं तो यह लेख आपके लिए है। इस लेख में, हमने बवासीर के प्रकार, लक्षण, कारण, इलाज और परहेज को मुख्य रूप से शामिल किया है।
बवासीर (Piles) क्या होता है?
बवासीर(Piles) जिन्हे हम पाइल्स, हेमोरोइड्स और मूलव्याधि भी कहा जाता है, यह पुरानी कब्ज़ और टाईट दस्त के कारण होता है। बवासीर एक बहुत ही दर्दनाक और असहज बीमारी है। यह भले ही जानलेवा न हो लेकिन अगर हम इसे बहुत देर तक नज़र अंदाज़ करे तो यह गंभीर रूप में सकती है।
जब गुदा व मलाशय के नीचे के क्षेत्र में मौजूद नसों में सूजन और जलन होती है़ तब यह बवासीर या पाइल्स का रूप ले लेता है। जो की कई प्रकार की होती है। बड़ी उम्र के लोगों में बवासीर आमतौर पर पायी जाती है, लेकिन आजकल यह हर युवाओं में भी देखी जा रही है। समें गुदा मार्ग में मस्से बन जाते है और कई बार इससे खून भी निकलता है। इन मस्सों को महसूस किया जा सकता है जो बहुत असहज होते है।
बवासीर(Piles) कितने प्रकार की होती है?
हम बवासीर(Piles) के प्रकारों के बारे में बात करेंगे। बवासीर को उसकी गंभीरता और अन्य कारकों के आधार पर दो प्रमुख प्रकार की होती है, जिनके कि लक्षण और इलाज विभिन्न होते है।
खूनी बवासीर:
बवासीर उभरती हुई और सूजी हुई नसों के कारण अंदरूनी या बाहरी गुदा में होती है। इसमें पीड़ित को खून आने की शिकायत हो सकती है। पाइल्स पाए जाने रोगियों में सबसे ज्यादा खूनी बवासीर ही पायी जाती है।
बादी बवासीर:
बादी बवासीर जो की गूदे के बाहर के हिस्से में पायी जाती है जिस कारण इसे बाहरी बवासीर भी कहा जाता है। इसमें गूदे के आसपास मस्से हो जाते है जिससे की सूजन या खुजली होने से असहनीय दर्द होता है।
बवासीर(Piles) के लक्षण:
बवासीर(Piles) होने के लक्षण कई प्रकार के हो सकते है, लेकिन आमतौर पर इसके लक्षण मस्से और उन में से खून निकलना ही माना जाता है। पाइल्स होने निम्नलिखित है।
खूनी बवासीर के लक्षण:
खूनी बवासीर जो की अंदरूनी बवासीर होती है। यह गूदे के अंदरूनी भाग में पायी जाती है। यह देखी नहीं जा सकती, खूनी बवासीर के लक्षण कई प्रकार के हो सकते है।
- इसका मुख्य लक्षण गूदे में से खून बहना होता है।
- मल त्याग करने में दर्द होना।
- इसमें सूजन भी हो सकता है।
बादी बवासीर के लक्षण:
बादी बवासीर जो की बाहरी बवासीर होती है। यह गूदे के बाहरी हिस्से में होती है। यह देखी व महसूस भी किया जा सकता है, बादी बवासीर के लक्षण कई प्रकार के हो सकते है।
- इसमें गूदे के आसपास मस्से हो सकते है।
- गूदे के आसपास के हिस्से में खुजली और जलन अनुभव हो सकती है।
- सूजन होने के कारण मल त्याग करने में कष्ट होना।
बवासीर(Piles) क्यों होता है?
बवासीर(Piles) कई कारणों से हो सकता है। कुछ मुख्य कारण में मल त्याग करते समय जोर लगाना, बैठने की लम्बी अवधि, कब्ज या दस्त का अधिक समय तक होना, ओबेसिटी, और गर्भावस्था शामिल है।
बवासीर(Piles)की शुरुआत कैसे होती है?
बवासीर(Piles) उस समय शुरू होता है जब गुदा और मलाशय क्षेत्र की नसें सूज और फूल जाती हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं। बवासीर की शुरुआती अवस्था में, लोगों को गुदा क्षेत्र में दर्द, खुजली और सूजन जैसे लक्षणों का सामना करना पड़ता है। कुछ मामलों में मल त्याग करते समय खून भी निकल सकता है।
बवासीर(Piles) का कारण क्या है?
बवासीर(Piles) महिलाओं और पुरुषों दोनों में पायी जाती है, बवासीर के बहुत से कारण हो सकते है। बवासीर होने के निम्नलिखित है।
- यह शरीर की मांसपेशियां कमज़ोर होने के कारण होती हे।
- गर्भावस्था में भी पाइल्स होने की सम्भावना होती है।
- उम्र के बढ़ने से भी बवासीर होने का खतरा बढ़ जाता है।
- गलत खानपान या जीविका से यह युवाओं में भी पायी जाती है।
- इसके लिए और भी कारण हो सकते है जैसे मोटापा, कब्ज, दस्त या जेनेटिक।
बवासीर(Piles) में परहेज
अगर किसी को भी बवासीर हो तो तुरंत उसके लिए इलाज शुरू कर देना चाहिए। इसी के साथ ही आपको कई चीजों से परहेज भी करना चाहिए।
खूनी बवासीर में परहेज :
खूनी बवासीर में परहेज करना ज़रूरी है। इससे आपको परेशानी से राहत मिल सकती है और आप स्वस्थ्य जीवन का आनंद ले सकते हैं। इसे बढ़ने से रोकने या इसके दर्द से बचने के लिए कई आपको कई चीजों से बचना होगा। खूनी बवासीर में परहेजनिम्नलिखित है।
- इसमें धूम्रपान और शराब के सेवन से परहेज करना चाहिए।
- अत्यंत मसाले वाले खाने से भी परहेज करना चाहिए।
- बहार का खाना या जंक फूड खाने से भी बचना चाहिए।
- मैदा और नमकीन पदार्थ का सेवन ना करें।
- कच्चे फल जलन पैदा कर सकते हैं।
बादी बवासीर में परहेज :
इस प्रकार की बवासीर में भी परहेज एक जैसे ही हैं। आपको इतना ही ध्यान में रखना है की कुछ तला हुआ है ज्यादा मसाले वाला खाना नहीं चाहिए, इसी के साथ ही रोज कसरत करना चाहिए।
बवासीर(Piles) का इलाज
बवासीर(Piles) होने बहुत से अलग अलग तरह का इलाज करते हैं जिसमें कि घरेलू या देसी इलाज भी शामिल है। इसी के साथ ही पाइल्स के इलाज के लिए सर्जरी भी मौजूद है जो की पाइल्स की समस्या को जड़ से पूरी तरह से खत्म कर देती है। तो पेश है बवासीर के इलाज।
खूनी बवासीर का इलाज
खूनी बवासीर का इलाज, रोग की स्तिथि देख कर हो सकता है छोटे बवासीर या शुरुआती दौर की बवासीर में कुछ घरेलू व् देसी इलाज अपनाये जा सकते है। पाइल्स बढ़ने पर या इसके लक्षण दिखने पर सर्जरी के लिए डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए, इसका इलाज संभव है।
बादी बवासीर का इलाज
इस में बवासीर के लक्षण बहुत ही दर्दनाक या असहनीय हो सकते है। घरेलू या देसी इलाज करवाने से इसके कई गंभीर परिणाम भी पाए जाते है, जिससे की बवासीर के रोग में वृद्धि भी हो सकती है। यह इलाज कुछ समय के लिये तो आपको दर्द से आराम दिला सकते है लकिन अगर आप इस बीमारी को हमेशा के लिए खत्म करना चाहते हैं तो सर्जरी ही इसका एकमात्र इलाज है। अगर आप भी बवासीर के रोग से जूझ रहे तो समय पर सर्जरी करवाने से इससे निजात पाया जा सकता है।
बवासीर(Piles) कैसा दिखता है?
बवासीर(Piles) एक्सटर्नल और इंटरनल दोनों ही एक फुंसी की तरह दिखते हैं। इन्हें छूकर महसूस किया जा सकता है। बवासीर आमतौर पर नीले रंग और रबड़ की तरह संरचना होती है। इसके कारण सूजी हुई नसों के अंदर ब्लड क्लॉट्स बनते हैं।
बवासीर(Piles) के इलाज में कितने प्रकार के टेस्ट होते हैं? ।
एक्सटर्नल बवासीर को ठीक करने के लिए डॉक्टर आपके बट-सेंट्रिक ट्रेंच और मलाशय (रेक्टम) का टेस्ट करते हैं। इसे निम्न प्रकार की जांच के माध्यम से ठीक किया जा सकता है।
कम्प्यूटराइज्ड एग्जामिनेशन:
कम्प्यूटर की मदद से रेक्टल एग्जामिनेशन के दौरान डॉक्टर मलाशय (रेक्टम) में एक दस्तानेयुक्त, नमीयुक्त उंगली को एम्बेड करते हैं और असामान्य गांठ का पता लगाते हैं। यह प्रक्रिया आंतरिक बवासीर की जांच के लिए की जाती है। आंतरिक बवासीर को आमतौर पर महसूस नहीं किया जा सकता। इस स्थिति में अगर मरीज को अधिक दर्द और ब्लीडिंग होती है तो डॉक्टर रेक्टम जांच को रोक देते हैं।
विसुअल रिव्यू:
कई बार रेक्टल एग्जामिनेशन के दौरान इंटरनल बवासीर का पता लगाना मुश्किल होता है। इसके बेहतर परिणाम के लिए डॉक्टर रेक्टम और कोलन के अंतिम भाग को प्रोक्टोस्कोप और एनोस्कोप से देखते हैं। अगर डॉक्टर को लगता है की मलाशय से खून आने का कारण बवासीर के अलावा कुछ और हो सकता है तो वह एनोस्कोपी (Anoscopy) करते हैं। अगर खून पेट की बाकी जगहों से बहता है तो सिग्मोइडोस्कोपी (Sigmoidoscopy) या कोलोनोस्कोपी की जाती है।
बवासीर(Piles) का इलाज कैसे होता है? ।
नॉन-सर्जिकल तरीके:
- नियमित व्यायाम करें।
- उचित आहार लें।
- मल सॉफ्टनर का उपयोग करें।
- गर्म सिट्ज बाथ लें।
- क्रीम, ऑइंटमेंट और सपोसिटरी का उपयोग करें।
सर्जिकल तरीके:
- बवासीर वाली जगह को काटने के लिए स्केलपेल का उपयोग करना।
- लगातार दबाव के साथ बवासीर को धीरे से पुश करना।
- एक छोटे से चीरे से बवासीर को हटाना।
बवासीर(Piles) के इलाज के लिए दवाएं ।
- डॉक्टर बटलर: जलन, खुजली, ब्लीडिंग को कम करने में मदद करता है।
- थेना नेचुरल वेलनेस: यह सिट्ज बाथ के लिए उपयोग की जाती है।
- हेम कंट्रोल कैप्सूल: इसे क्रीम, ऑइंटमेंट या अन्य उपचारों के विकल्प के रूप में उपयोग किया जाता है।
- ट्रोनोलेन हेमोराइड क्रीम: यह सूजन, खुजली और दर्द को ठीक व कम करने के लिए एस्ट्रिंजेंट के रूप में काम करती है।
- मदरलव ऑर्गेनिक रॉयड बाम: विशेष रूप से यह गर्भवती महिलाओं के लिए एक ऑइंटमेंट है।
- डोनट टेलबोन कुशन: यह कुशन विशेष रूप से बवासीर से पीड़ित लोगों के लिए बनाया गया है।
क्या बवासीर अपने आप ठीक हो सकता है?
छोटे बवासीर आमतौर पर थोड़े समय के साथ अपने आप ठीक हो जाते हैं। जबकि बड़े और गंभीर बवासीर को ठीक होने में समय लग सकता है। इससे पीड़ित लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हालांकि आहार में कुछ बदलाव करके और घरेलू उपचार की मदद से बवासीर अपने आप ठीक हो सकता है। अगर लक्षण गंभीर हैं तो इसे डॉक्टरी इलाज के जरिए ठीक किया जा सकता है।
बवासीर(Piles) में किन चीजों से परहेज करना चाहिए ।
- प्रोसेस्ड मीट: बवासीर के मरीजों को प्रोसेस्ड मीट खाने से बचना चाहिए। यह पाचनतंत्र को प्रभावित करता है। जिससे मल त्यागने में परेशानी हो सकती है।
- पॉलिश वाले चावल: पॉलिश किए हुए चावल पूरी तरह से सफेद होते हैं। इनमें फाइबर और पोषण नहीं होता। चावल को पॉलिश करके उसमें स्टार्च भर दिया जाता है। इसके कारण वे पूरी तरह से कार्बोहाइड्रेट से भरे होते हैं। इन चावल को खाने से कब्ज की समस्या हो सकती है।
- डीप-फ्राइड खाना: बवासीर के मरीजों को डीप-फ्राइड खाद्य पदार्थों को खाने से बचना चाहिए। इनमें पोषक तत्वों की कमी होती है और लीवर के लिए हानिकारक होते हैं।
- डेयरी उत्पाद: बवासीर के मरीजों को दूध से बने उत्पादों का सेवन नहीं करना चाहिए। यह कब्ज का कारण बन सकते हैं।
कैफीनयुक्त भोजन: बवासीर की समस्या से पीड़ित व्यक्ति को चाय, कॉफी और कोला जैसे पेय पदार्थों से दूरी बनाना चाहिए।
बवासीर(Piles) के इलाज के लिए के घरेलू उपाय ।
- विच हेजल: विच हेजल को बवासीर पर लगाने से न केवल खुजली कम होती है बल्कि दर्द भी कम होता है। यह एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होता है। इससे सूजन में कमी आ सकती है।
- एलोवेरा: एलोवेरा में असाधारण एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो बवासीर के कारण होने वाली जलन को कम करने में मदद करता है
- ओवर द काउंटर ऑइंटमेंट: बवासीर के लक्षणों से तत्काल राहत पाने के लिए काउंटर ऑइंटमेंट का उपयोग कर सकते हैं।
- सूथिंग वाइप्स: यदि बवासीर से पीड़ित व्यक्ति सामान्य टॉयलेट पेपर का उपयोग करता है तो यह स्थिति को बिगाड़ सकता है। इसलिए बवासीर के पेशेंट को जलन कम करने के लिए वाइप्स का इस्तेमाल करना चाहिए।
- कोल्ड कंप्रेस: बड़े और दर्दनाक बवासीर के लिए आइस पैक लगाने से आराम मिलता है। इसके लिए बर्फ को एक तौलिए या कपड़े में लपेटकर लगाना चाहिए।
- गर्म स्नान: बवासीर से पीड़ित व्यक्ति को गर्म स्नान करना चाहिए। यह बवासीर की जलन को शांत करने में मदद करता है।
- अंजीर: सुबह खाली पेट अंजीर का पानी पीने से बवासीर में आराम मिलता है। इसके लिए तीन अंजीर को पानी में भिगोकर रख दें और सुबह खाली पेट इसका सेवन करें।
- नींबू: नींबू के रस में अदरक और शहद मिलाकर इसका सेवन करने से पाइल्स में फायदा पहुंचता है।
- जीरा: बादी बवासीर में दर्द और जलन होने पर जीरे के दानों को पानी डालकर पीसकर लेप बना लें। इसे मस्सों वाली जगह पर लगाने से पाइल्स में आराम मिलता है। खूनी बवासीर में आराम के लिए जीरे को भूनकर मिश्री के साथ पीस लें। इसे दिन में 2-3 बार छांछ के साथ लेने से खूनी बवासीर में आराम मिलता है।
- पपीता: पपीता हमारे पाचनतंत्र को ठीक रखता है। रात के भोजन में पपीता खाएं। इससे कब्ज नहीं होगी और मल त्यागते समय होने वाली पीड़ा से छुटकारा मिलेगा।
- बादाम का तेल: बादाम के तेल को रूई में लेकर बवासीर के छालों पर लगाने से जलन व सूजन में राहत मिलती है।
- वैसलीन: वैसलीन की थोड़ी सी मात्रा गुदा पर लगाने से मल त्यागने में होने वाले दर्द को कम किया जा सकता है। वैसलीन, तनाव और ब्लीडिंग को कम करके मल को आसानी से पास करती है। यह केवल छोटे बवासीर के खिलाफ प्रभावी है।
- वॉकिंग: सैर करना, बवासीर के लिए अच्छा माना जाता है। इससे रक्त प्रवाह बढ़ता है और शरीर में पोषक तत्व और ऑक्सीजन एब्जॉर्व होती है। यह बवासीर के लिए सबसे सुरक्षित और सबसे प्रभावी उपायों में से एक है।
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